खड्डा की तर्ज पर प्रदेश भर में लगेंगे इंडिया मार्क टू हैंडपम्प
कुशीनगर जिले के खड्डा विधानसभा के विधायक जटाशंकर त्रिपाठी की पहल लाई रंग लाई है। अब प्रदेश के सभी जिलों में बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में खड्डा की तर्ज पर इंडिया मार्क टू हैंडपम्प लगाए जाएंगे। प्रत्येक हैंडपम्प के साथ 3 से 4 फीट ऊंचा चबूतरा एवं सोक पिट का निर्माण कर उसे जल निकासी के लिए नाली से जोड़ना अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त नए ढंग से ईंट द्वारा डस्टबीन का निर्माण किया जाएगा। यह कदम जल व पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार होगा।
खड्डा विधायक जटाशंकर त्रिपाठी ने 'हिन्दुस्तान को बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में ऐसे कई इलाके हैं जहां बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या रहती है। ऐसे में इंडिया मार्क टू हैंडपम्प के पास भी जलभराव होता है। इसके अलावा कई स्थानों पर लगाए गए हैं लेकिन नाली से जुड़ाव न होने के कारण जलनिकासी की समस्या रहती है। इसलिए यह विचार आया कि इंडिया मार्क टू हैंडपम्प के चबूतरे जलभराव वाले क्षेत्रों में 3 से 4 फीट उंचाई पर बनाए जाएं। सोक पिट बना हैंडपम्प से निकलने वाले जल को उसमें डाला जाए। इस तर्ज पर 5 की संख्या में हैंडपम्प लगाए गए जिसे स्थानीय लोगों ने पसंद किया। इस कदम से जल संरक्षण की दिशा में भी मदद मिली।
ईंट से बनाए डस्टबिन
विधायक जटाशंकर ने बताया कि प्रदेश में प्लास्टिक का इस्तेमाल प्रतिबंधित हैं लेकिन वर्ष की शुरूआत में ग्राम पंचायतों में प्लास्टिक के डस्टबिन निर्मित किए गए। ये डस्टबिन ठीक से इस्तेमाल भी नहीं हुए कि अधिकांश टूट गए। इसे ध्यान में रखते हुए अपने विधानसभा क्षेत्र में ईट से निर्मित डस्टबिन का निर्माण कराया। यह डस्टबिन मजबूत, कूड़ा निकालने में सहज और आकर्षक भी हैं। ऐसे 5 डस्टबिन इस्तेमाल किए जा रहे हैं जिसे स्थानीय लोगों ने भी सराहा है। सफाईकर्मियों ने भी सुविधाजनक बताया है।
दो दिसंबर को निदेशक पंचायती राज ने जारी किया निर्देश
निदेशक पंचायतीराज डॉ ब्रह्मदेव राम तिवारी के समक्ष विधायक ने 14 सितंबर को डस्टबिन और नए ढंग से बने हैंडपम्प के चबूतरे और सोक पिट का प्रस्तुतिकरण किया था। करीब ढ़ाई महीने बाद 2 दिसंबर को निदेशक पंचायतीराज ने सभी जिलों के जिला पंचायत राज अधिकारी को पत्र लिख कर बाढ़ ग्रस्त एवं जल भराव वाले क्षेत्रों में इंडिया मार्क टू हैंडपम्प के चबूतरे को 3 से 4 फीट ऊंचा बनाने के निर्देश दिए हैं। ताकि जल स्त्रोत दूषित न हो। इसके अलावा भूमिगत जल के रिचार्ज करने की खातिर हैंडपम्प से निकले वेस्ट वॉटर के लिए सोकपिट बनाने के निर्देश दिए हैं। ग्राम पंचायतों में अपशिष्ट प्रबंधन के लिए उन्होंने ईंट से बने डस्टबिन के निर्माण के लिए भी निर्देश दिए हैं।
कोट
मुझे उम्मीद है कि जिला पंचायतराज अधिकारी एवं ग्राम प्रधान अपनी अपनी ग्राम पंचायतों में जनसमान्य की सुविधा के लिए इस बदलाव को स्वीकार करेंगे। इस छोटे से बदलाव से न केवल हम बाढ़ और बारिश के समय में पीने का स्वच्छ जल मुहैय्या करा सकेंगे साथ ही भूमिगत जल रिचार्ज कर जल संरक्षण से मिलने वाले पुण्य के भागी भी बनेंगे। ईट से बनाए गए डस्टबिन न केवल लम्बे समय तक इस्तेमाल होंगे। प्लास्टिक पर लगे प्रतिबंध का अनुपालन होगा और पर्यावरण संरक्षण भी।